कुंडलिनी शक्ति क्या है? मानव शरीर में छिपी दिव्य ऊर्जा का रहस्य
कुंडलिनी शक्ति क्या है, सात चक्रों का रहस्य, योग और तंत्र साधना के माध्यम से कुंडलिनी जागरण की प्रक्रिया तथा आध्यात्मिक महत्व का विस्तृत और गहन विश्लेषण। सनातन परंपरा में मनुष्य को केवल मांस और हड्डियों से बना शरीर नहीं माना गया है, बल्कि उसे एक दिव्य ऊर्जा का केंद्र बताया गया है। प्राचीन ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्षों के ध्यान, तपस्या और साधना के माध्यम से यह अनुभव किया कि मनुष्य के भीतर एक अद्भुत शक्ति विद्यमान है, जिसे कुंडलिनी शक्ति कहा जाता है। यह शक्ति सामान्य अवस्था में सुप्त रहती है, लेकिन जब साधना, योग, ध्यान और आध्यात्मिक अनुशासन के माध्यम से इसे जागृत किया जाता है, तब मनुष्य के भीतर असाधारण परिवर्तन होने लगते हैं। भारतीय योग परंपरा में कुंडलिनी को सर्पाकार ऊर्जा के रूप में वर्णित किया गया है, जो रीढ़ की हड्डी के मूल स्थान में कुण्डली मारकर सोई हुई रहती है। जब यह शक्ति जागृत होती है, तब यह शरीर के सात चक्रों को भेदती हुई ऊपर सहस्रार तक पहुँचती है और साधक को उच्च चेतना की अवस्था में पहुँचा देती है। इसी कारण कुंडलिनी जागरण को आत्म-साक्षात्कार की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्म...