त्रिया राज्य की रहस्यमयी नगरी और कामाख्या शक्तिपीठ का अद्भुत रहस्य आँखों देखी साधना यात्रा भाग 1
तंत्र में शिव और शक्ति का गुप्त दर्शन क्या है? इस सीरीज़ सर्वशक्तिशाली प्रथम शक्तिपीठ कामाख्या की साधना यात्रा भाग 1 से 3 तक की लेख में अमित श्रीवास्तव द्वारा जानें तांत्रिक साधना, कुंडलिनी ऊर्जा, कामाख्या पीठ, और शिव-शक्ति के रहस्यमय मिलन, दैवीय प्रेरणा से प्रस्तुत वर्णन, सब कुछ आंखों देखा अनुभव। यह सीरीज़ लेख तंत्र के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और रहस्यमयी पक्ष को गहराई से समझाता है।
लेखक – अमित श्रीवास्तव
भारत की भूमि केवल भौगोलिक सीमाओं में बंधा हुआ एक देश नहीं है, बल्कि यह हजारों वर्षों से आध्यात्मिक रहस्यों, तांत्रिक परंपराओं, योग साधना और देवी-देवताओं की कथाओं से भरा हुआ एक जीवंत संसार है। इस धरती पर ऐसे अनेक स्थान हैं जहाँ जाने पर मनुष्य को लगता है कि वह किसी सामान्य स्थान पर नहीं बल्कि किसी अदृश्य शक्ति के प्रभाव क्षेत्र में प्रवेश कर गया है।
ऐसा ही एक रहस्यमयी स्थान पूर्वोत्तर भारत में स्थित है — Kamakhya Temple, जो Nilachal Hill पर स्थित है।
मेरे मन में वर्षों से इस स्थान के बारे में एक जिज्ञासा थी। तांत्रिक ग्रंथों, लोककथाओं और साधुओं की वाणी में बार-बार एक शब्द सुनाई देता था — त्रिया राज्य। कहा जाता है कि यह एक ऐसी रहस्यमयी नगरी है जहाँ केवल स्त्रियों का राज्य है, और वे स्त्रियाँ साधारण नहीं बल्कि योगिनी और तांत्रिक शक्तियों से सम्पन्न दिव्य स्त्रियाँ हैं।
कई लोगों ने इसे कल्पना कहा, कई ने इसे तांत्रिक प्रतीक बताया, और कुछ साधकों ने दावा किया कि यह स्थान वास्तव में अस्तित्व में है, लेकिन सामान्य लोगों की आँखों से छिपा हुआ है।
इसी रहस्य को समझने की इच्छा से मैं 13 वर्ष की आयु में एक दिन असम की यात्रा पर निकल पड़ा।
गुवाहाटी की धरती पर पहला कदम
जब विमान ने Guwahati के आकाश में उतरना शुरू किया तो नीचे फैला हुआ विशाल Brahmaputra River का दृश्य अत्यंत मनोहारी था।
यह नदी केवल एक जलधारा नहीं बल्कि असम की जीवन रेखा है। इसके किनारों पर बसे शहर, मंदिर और जंगल इस पूरे क्षेत्र को एक रहस्यमयी सौंदर्य प्रदान करते हैं।
गुवाहाटी पहुँचने के बाद जैसे ही मैं शहर से नीलांचल पर्वत की ओर बढ़ा, मुझे महसूस हुआ कि यह यात्रा केवल एक पर्यटन यात्रा नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव बनने वाली है।
नीलांचल पर्वत की चढ़ाई – जैसे किसी रहस्य की ओर बढ़ते कदम
नीलांचल पर्वत की ओर जाने वाला रास्ता धीरे-धीरे ऊपर चढ़ता है। सड़क के दोनों ओर घने पेड़ हैं और बीच-बीच में छोटे-छोटे मंदिर दिखाई देते हैं।
जैसे-जैसे मैं ऊपर बढ़ रहा था, हवा में एक अलग तरह की सुगंध महसूस हो रही थी — धूप, अगरबत्ती और जंगल की मिट्टी की मिली-जुली सुगंध।
रास्ते में कई साधु दिखाई दे रहे थे। कुछ साधु भस्म लगाए बैठे थे, कुछ जप कर रहे थे और कुछ साधक मौन साधना में लीन थे।
उनके चेहरे पर एक अलग प्रकार की शांति थी, जैसे वे इस स्थान के रहस्य को जानते हों।
कामाख्या मंदिर का पहला दर्शन
कुछ ही समय में मैं Kamakhya Temple के मुख्य द्वार के सामने खड़ा था।
मंदिर का वास्तुशिल्प अत्यंत प्राचीन और अद्भुत है। ऊपर लाल रंग का शिखर, चारों ओर छोटे-छोटे मंदिर और भक्तों की भीड़।
लेकिन इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ देवी की कोई मूर्ति नहीं है।
गर्भगृह में एक प्राकृतिक शिलाखंड और जलकुंड है, जिसे देवी की योनि शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
सती की कथा और शक्तिपीठ का रहस्य
कथा के अनुसार जब Daksha ने यज्ञ का आयोजन किया और अपने दामाद Shiva का अपमान किया, तो उनकी पुत्री Sati ने क्रोधित होकर यज्ञ अग्नि में अपने शरीर का त्याग कर दिया।
इस घटना से व्यथित होकर शिव ने सती के शरीर को उठाया और पूरे ब्रह्मांड में घूमने लगे।
तब सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए Vishnu ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित कर दिया।
जहाँ-जहाँ उनके अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने।
नीलांचल पर्वत पर सती का योनि भाग गिरा, इसलिए यह स्थान सृष्टि की मूल शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
त्रिया राज्य की पहली चर्चा
मंदिर दर्शन के बाद मैं मंदिर परिसर के पीछे की ओर गया। वहाँ कुछ साधु बैठे थे।
मैंने उनसे बातचीत शुरू की।
जब मैंने उनसे त्रिया राज्य के बारे में पूछा, तो उनमें से एक वृद्ध साधु मुस्कुराए और बोले —
“हर चीज किताबों में नहीं मिलती। कुछ बातें अनुभव से समझ आती हैं।”
उन्होंने बताया कि नीलांचल पर्वत के कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ साधारण लोग नहीं जाते।
कहा जाता है कि उन्हीं क्षेत्रों में त्रिया राज्य की कथा जुड़ी हुई है।
त्रिया राज्य – लोककथाओं में वर्णित स्त्री शक्ति का संसार।
स्थानीय लोगों के अनुसार त्रिया राज्य एक ऐसा स्थान है जहाँ योगिनी शक्तियाँ निवास करती हैं।
इन योगिनियों को देवी की सहचरियाँ माना जाता है।
तंत्र परंपरा में 64 योगिनियों का उल्लेख मिलता है, जो देवी शक्ति की विभिन्न रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
कई साधकों का मानना है कि त्रिया राज्य वास्तव में योगिनी ऊर्जा का प्रतीकात्मक लोक है।
योगिनियों की शक्ति और तांत्रिक परंपरा
तांत्रिक ग्रंथों में योगिनियों को अत्यंत शक्तिशाली माना गया है।
कहा जाता है कि जो साधक योगिनी साधना में सिद्ध हो जाता है, उसे असाधारण आध्यात्मिक शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
इसी कारण कामाख्या क्षेत्र को तांत्रिक साधना का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।
अम्बुवाची मेला – देवी का रहस्यमयी पर्व
कामाख्या मंदिर में हर वर्ष एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व मनाया जाता है — Ambubachi Mela।
इस समय यहां देवी कामाख्या तीन दिनों तक रजस्वला होती हैं और मंदिर के पट बंद रहते हैं।
तीन दिन बाद मंदिर पुनः खुलता है और लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए कतारों में लगे रहते हैं।
अम्बुवाची वस्त्र का रहस्य
इस समय भक्तों को प्रसाद के रूप में लाल रंग का कपड़ा दिया जाता है, जिसे “अम्बुवाची वस्त्र” कहा जाता है। तांत्रिक साधना में इसे अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।
कई साधक इसे अपने साधना स्थल पर रखते हैं। तो कुछ साधक इस दिव्य रजस्वला वस्त्र का उपयोग तमाम तरह की समस्याओं से ग्रस्त लोगों के कल्याणार्थ ताबीज मे भर कर प्रसाद के रूप में देते हैं जो सदैव कल्याणकारी होता है। देवी कामेश्वरी कामाख्या कि कृपा से मंदिर के मुख्य पुजारी, हमारे तांत्रिक गुरु जी द्वारा हमें प्रसाद के रूप में प्रति वर्ष प्राप्त हो जाता है, जो तमाम तांत्रिक और जरुरतमंद लोग मुझसे प्राप्त करते हैं।
रहस्य की शुरुआत
नीलांचल पर्वत की उस शाम जब सूर्य धीरे-धीरे ब्रह्मपुत्र के पार डूब रहा था, मैं मंदिर के पीछे खड़ा था। चारों ओर जंगल की निस्तब्धता थी और दूर-दूर तक पहाड़ों की परछाइयाँ दिखाई दे रही थीं। उस क्षण मुझे ऐसा लगा मानो इस पर्वत के भीतर कोई प्राचीन रहस्य छिपा हुआ है — एक ऐसा रहस्य जिसे केवल साधना और अनुभव से ही समझा जा सकता है। और शायद यही वह रहस्य है जिसे लोककथाओं में त्रिया राज्य कहा गया है। ऐसे तमाम रहस्यमयी जानकारी के लिए बने रहिए दैवीय कलम के साथ sanatantantrarahasya.blogspot.com सनातन तांत्रिक रहस्य पर और भी अपनी पसंदीदा लेख खोजें पढ़ें और लाभ उठाएं। सम्बंधित और जानकारी अगले लेख में। हमारी 51 शक्तिपीठ लेखनी amitsrivastav.in वेबसाइट पर भी विस्तृत जानकारी के साथ उपलब्ध है।



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