त्रिया राज्य की रहस्यमयी नगरी और कामाख्या शक्तिपीठ का अद्भुत रहस्य आँखों देखी साधना यात्रा भाग 2

तंत्र साधना में कुंडलिनी जागरण, शक्ति उपासना और साधक के आंतरिक अनुभवों की रहस्यमयी यात्रा को लेखक अमित श्रीवास्तव ने आंखों देखी प्रस्तुति किया है। यह सीरीज़ लेख तांत्रिक दर्शन, ऊर्जा विज्ञान और शिव-शक्ति के दिव्य रहस्य को गहराई से समझाने का अद्भुत प्रयास है। इस लेख का पहला भाग 1 आपने नही पढ़ा है तो यहां नीचे ब्लू लाइन पर क्लिक कर पहला भाग पढे़— https://sanatantantrarahasya.blogspot.com/2026/03/1.html?m=1

भाग – 2 : योगिनियों की भूमि, तंत्र साधना और त्रिया जाल की कथाएँ

त्रिया राज्य की रहस्यमयी नगरी और कामाख्या शक्तिपीठ का अद्भुत रहस्य आँखों देखी साधना यात्रा भाग 2

लेखक – अमित श्रीवास्तव
नीलांचल पर्वत पर स्थित पवित्र Kamakhya Temple के दर्शन के बाद मेरे मन में एक ही प्रश्न बार-बार उठ रहा था — क्या सचमुच इस पर्वत के किसी अदृश्य क्षेत्र में वह रहस्यमयी “त्रिया राज्य” मौजूद है, जिसके बारे में लोककथाएँ, तांत्रिक ग्रंथ और साधुओं की वाणी आज भी चर्चा करती है?

जब शाम ढलने लगी और ब्रह्मपुत्र के ऊपर आकाश लालिमा से भर गया, तब मैं मंदिर के पीछे की ओर निकल पड़ा। वहाँ जंगल और पहाड़ी ढलानों के बीच कुछ ऐसे रास्ते दिखाई देते हैं जहाँ सामान्य यात्री कम ही जाते हैं। उसी समय मुझे एक वृद्ध साधु मिले। उनकी जटाएँ कमर तक लटक रही थीं और शरीर पर भस्म लगी हुई थी। उन्होंने शांत स्वर में कहा — “कामाख्या केवल मंदिर नहीं है, यह शक्ति का द्वार है। और शक्ति जहाँ होती है, वहाँ योगिनियों का लोक भी होता है।”

योगिनी परंपरा और त्रिया राज्य की अवधारणा

तांत्रिक परंपराओं में योगिनी शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। योगिनी को केवल स्त्री नहीं बल्कि देवी शक्ति की स्वतंत्र ऊर्जा कहा जाता है। कई तांत्रिक ग्रंथों में 64 योगिनियों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें देवी की सहचरियाँ और तंत्र साधना की संरक्षक माना जाता है।
ऐसा विश्वास है कि इन योगिनियों का एक अदृश्य लोक होता है जहाँ वे साधकों की परीक्षा लेती हैं और योग्य साधक को सिद्धि प्रदान करती हैं। इस लोक को भी कई परंपराओं में “त्रिया राज्य” या “योगिनी लोक” कहा गया है।

कई तांत्रिक मानते हैं कि यह स्थान सामान्य मनुष्यों की दृष्टि से छिपा हुआ है और केवल सिद्ध साधक ही इसकी अनुभूति कर सकते हैं।

त्रिया जाल की कथा

लोककथाओं में कहा जाता है कि त्रिया राज्य की योगिनियाँ अत्यंत सुंदर होती हैं — परियों के समान रूपवती, आकर्षक और मोहक। लेकिन उनका सौंदर्य केवल बाहरी नहीं होता, वह एक प्रकार की मायावी शक्ति भी होता है।

कहा जाता है कि यदि कोई पुरुष बिना साधना और बिना अनुमति उस क्षेत्र में प्रवेश कर जाए तो वह उनके आकर्षण के जाल में फँस जाता है। यह जाल केवल शारीरिक आकर्षण नहीं बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक प्रभाव भी होता है।

कई कथाओं में यह भी कहा गया है कि जो व्यक्ति इस जाल में फँस जाता है, वह धीरे-धीरे अपनी पुरानी पहचान भूल जाता है और उस रहस्यमयी संसार का हिस्सा बन जाता है।

नाथ परंपरा और त्रिया राज्य की कथा

त्रिया राज्य का सबसे प्रसिद्ध उल्लेख नाथ संप्रदाय की कथाओं में मिलता है। नाथ परंपरा के महान योगी Matsyendranath और उनके शिष्य Gorakhnath की कथा में इसका विशेष वर्णन है।
कहा जाता है कि एक बार योगी मत्स्येंद्रनाथ साधना करते-करते त्रिया राज्य की सीमा में पहुँच गए। वहाँ की रानी और योगिनियों ने अपने मायावी आकर्षण से उन्हें मोहित कर लिया। धीरे-धीरे वह उस संसार में ही रहने लगे और अपनी योग साधना को भूल गए।

जब यह समाचार उनके शिष्य गोरखनाथ को मिला, तो उन्होंने अपने गुरु को वापस लाने का संकल्प लिया।

गोरखनाथ का स्त्री रूप में प्रवेश

कथा के अनुसार त्रिया राज्य में पुरुषों का प्रवेश निषिद्ध था। इसलिए गोरखनाथ ने अपनी योग शक्ति से स्त्री का रूप धारण किया और उस रहस्यमयी राज्य में नर्तकियों के साथ प्रवेश किया।

वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि उनके गुरु मत्स्येंद्रनाथ राजमहल में रहते हैं और योगिनियों के बीच एक राजा की तरह जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

गोरखनाथ ने अनेक उपायों से उन्हें उनकी साधना और वास्तविक उद्देश्य की याद दिलाने का प्रयास किया। कई कथाओं में कहा गया है कि उन्होंने गीत, नृत्य और योग विद्या के माध्यम से गुरु को स्मरण कराया कि वह एक महान योगी हैं।

अंततः मत्स्येंद्रनाथ को अपनी भूल का एहसास हुआ और वह गोरखनाथ के साथ उस रहस्यमयी राज्य से बाहर आ गए।

त्रिया राज्य और हनुमान की कथा

लोककथाओं में एक और रोचक प्रसंग मिलता है जिसमें Hanuman का उल्लेख किया जाता है।

कहा जाता है कि एक बार हनुमान जी ने अपनी शक्ति का परीक्षण करते हुए उस रहस्यमयी क्षेत्र की सीमा पार करने का प्रयास किया। लेकिन जैसे ही उन्होंने उस सीमा को छुआ, उन्हें एक अदृश्य शक्ति का आघात महसूस हुआ और वह कुछ समय के लिए मूर्छित हो गए।
कथा में कहा गया है कि तब Rama ने उन्हें समझाया कि यह स्थान देवी शक्ति का क्षेत्र है और यहाँ प्रवेश केवल उन्हीं को मिलता है जिन्हें योगिनियों की अनुमति होती है।

महाभारत काल और हिडिम्बा

त्रिया राज्य से जुड़ी कथाएँ महाभारत काल से भी जोड़ी जाती हैं।
कहा जाता है कि भीम की पत्नी Hidimba अत्यंत मायावी शक्तियों से सम्पन्न थी। वह वन में रहने वाली एक ऐसी स्त्री थी जिसे तांत्रिक शक्तियों का ज्ञान था।

कुछ लोककथाओं में यह भी कहा जाता है कि हिडिम्बा ने अपनी शक्तियाँ योगिनी परंपरा से प्राप्त की थीं।

उनके पुत्र Ghatotkacha ने महाभारत युद्ध में अपनी मायावी शक्ति से कौरव सेना को भयभीत कर दिया था।

चित्रलेखा की कथा

एक और रोचक कथा कृष्ण काल से जुड़ी है। कहा जाता है कि बाणासुर की पुत्री उषा की सखी Chitralekha अत्यंत कुशल तांत्रिक और योगिनी विद्या में निपुण थी। उसी ने अपनी योग शक्ति से Aniruddha को द्वारका से उठाकर उषा के पास पहुँचा दिया था।
कई लोककथाओं में चित्रलेखा को भी योगिनी परंपरा से जुड़ा माना जाता है।

हिरीया-जिरीया और गोरखनाथ की पौराणिक कथा 

एक और रोचक कथा हिरीया जिरीया और गुरु गोरखनाथ की पौराणिक कथा जो सोरठी-विरजाभार कि कथा से भी जुड़ा हुआ है बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान तक की भूमि पर गीत और बिरहा के माध्यम से गाया जाता है। जिससे प्राचीन काल की रहस्यमयी जानकारी आज भी मिलता है। हमारे द्वारा हिरीया जिरीया और गुरु गोरखनाथ की पौराणिक कथा में बताया गया है कि गुरु गोरखनाथ की पराजय यहीं असम की भूमि पर दो जुड़वा बहनें हिरीया जिरीया के हाथ तांत्रिक युद्ध में हुआ था। सम्पूर्ण रहस्यमयी जानकारी के लिए यहां ब्लू लाइन पर क्लिक करें या किसी भी सर्च इंजन से सर्च कर amitsrivastav.in वेबसाइट्स पर जाकर पढे़।

तंत्र साधना और कामाख्या

नीलांचल पर्वत पर स्थित Kamakhya Temple को तंत्र साधना का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।

यहाँ अघोरी, साधु और तांत्रिक विभिन्न प्रकार की साधनाएँ करते हैं।
विशेष रूप से Ambubachi Mela के समय यह स्थान साधकों का केंद्र बन जाता है।

इन दिनों हजारों साधु-संत और तांत्रिक यहाँ साधना करने आते हैं।

ब्रह्मपुत्र और रहस्य का वातावरण 

नीलांचल पर्वत से नीचे बहती हुई विशाल Brahmaputra River इस पूरे क्षेत्र को और भी रहस्यमयी बना देती है।
संध्या के समय जब सूर्य अस्त होता है, तो ब्रह्मपुत्र का जल लाल रंग में चमकने लगता है। उस समय पर्वत, जंगल और मंदिर का दृश्य ऐसा प्रतीत होता है मानो यह कोई साधारण स्थान नहीं बल्कि किसी प्राचीन आध्यात्मिक लोक का द्वार हो।

त्रिया राज्य – प्रतीक या वास्तविकता?

कई विद्वान मानते हैं कि त्रिया राज्य वास्तव में किसी भौतिक नगरी का नाम नहीं बल्कि स्त्री शक्ति और योगिनी ऊर्जा का प्रतीक है।
यह उस आध्यात्मिक सत्य का संकेत है कि प्रकृति की मूल शक्ति स्त्री स्वरूप में है।

तंत्र दर्शन में शिव को चेतना और शक्ति को ऊर्जा माना गया है।
और जब तक शक्ति सक्रिय न हो, तब तक शिव भी निष्क्रिय रहते हैं।


लेखक का अनुभव

नीलांचल पर्वत पर बिताई गई वह शाम मेरे जीवन की सबसे रहस्यमयी शामों में से एक थी।

जंगल की निस्तब्धता, दूर से आती मंदिर की घंटियों की ध्वनि और ब्रह्मपुत्र की शांत धारा — इन सबके बीच खड़े होकर मुझे ऐसा लगा मानो यह स्थान वास्तव में किसी गहरे आध्यात्मिक रहस्य को छिपाए हुए है।

शायद यही कारण है कि हजारों वर्षों से साधक, तांत्रिक और श्रद्धालु इस स्थान की ओर आकर्षित होते रहे हैं। ऐसे और भी लेखनी पढ़ने के लिए सर्च आइकॉन पर क्लिक कर लिखें खोजें पढ़ें और लाभ उठाएं। अपने विचारों को कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएँ, फालो करें।

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